Zindagi Is Tarah

by Anuradha Paudwal

Anuradha Paudwal (born 27 October 1954) is an Indian playback singer who works in Bollywood. She was awarded the Padma Shri, India's fourth-highest civilian award, by the Government of India in 2017. She is a recipient of the National Film Award and a four-time winner of the Filmfare Award.




ज़िन्दगी इस तरह से लगने लगी
रंग उड़ जाए जो दीवारों से
अब छुपाने को अपना कुछ ना रहा
ज़ख्म दिखने लगी दरारों से

मैं तेरे जिस्म की हूँ परछाई
मुझको कैसे रखोगे खुद से जुदा
भूल करना तो मेरी फितरत है
क्यूँ की इन्साँ हूँ मैं नहीं हूँ खुदा
क्यूँ की इन्साँ हूँ मैं नहीं हूँ खुदा
मुझको है अपनी हर खता मंजूर
भूल हो जाती है इंसानों से
अब छुपाने को अपना कुछ ना रहा
ज़ख्म दिखने लगी दरारों से

जब कभी शाम के अंधेरों में
राह पंछी जो भूल जाते हैं
वो सुबह होते ही मीलों चलकर
अपनी शाखों पे लौट आते हैं
अपनी शाखों पे लौट आते हैं
कुछ हमारे भी साथ ऐसा हुआ
हम यही केह रहे इशारों से
ज़िन्दगी इस तरह से लगने लगी
रंग उड़ जाए जो दीवारों से
अब छुपाने को अपना कुछ ना रहा
ज़ख्म दिखने लगे दरारों से

Written by: ANU MALIK

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