Alvida

by K.K.




चुपके से कहीं धीमे पाँव से
जाने किस तरह किस घड़ी
आगे बढ़ गए हमसे राहों में
पर तुम तो अभी थे यहीं
कुछ भी न सुना कब का था गिला
कैसे कह दिया अलविदा

जिनके दरमियाँ गुज़री थी अभी
कल तक ये मेरी ज़िन्दगी
लो उन बाहों को ठंडी छाँव को
हम भी कर चले अलविदा
अलविदा अलविदा मेरी राहें अलविदा
मेरी साँसें कहती हैं अलविदा
अलविदा अलविदा अब कहना और क्या
जब तूने कह दिया अलविदा

सुन ले बेखबर यूँ आँखें फेरकर
आज तू चली जा
ढूंढेगी नज़र हमको ही मगर हर जगह
ऐसी रातों में ले के करवटें
याद हमें करना और फिर हारकर
कहना क्यों मगर कह दिया अलविदा
अलविदा अलविदा कोई पूछे तो ज़रा
क्या सोचा और कहा अलविदा
अलविदा अलविदा अब कहना और क्या
जब तूने कह दिया अलविदा

हम थे दिलजले फिर भी दिल कहे
काश मेरे संग आज
होते तुम अगर होती हर डगर गुलसिताँ
तुमसे हैं खफ़ा हम नाराज़ हैं
दिल है परेशां
सोचा न सुना तूने क्यों भला कह दिया
अलविदा अलविदा कोई पूछे तो ज़रा
क्या सोचा और कहा अलविदा
अलविदा अलविदा अब कहना और क्या
जब तूने कह दिया अलविदा
हो हो
अलविदा अलविदा अलविदा हा ह ह
क्यूँ सोचा और कहा अलविदा

लो उन बाहों को ठंडी छाँव को
हम भी कर चले अलविदा

Written by: PRITAM CHAKRABORTY, AMITABH VARMA

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